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रूसी चुनाव में पुतिन का जलवा, यूनाइटेड रशिया ने बनाया नया रिकॉर्ड

SHIDDHANT
22 Sept 2026 12:19 AM IST
रूसी चुनाव में पुतिन का जलवा, यूनाइटेड रशिया ने बनाया नया रिकॉर्ड
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Moscow. मॉस्को। रूस की राजनीति में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पकड़ एक बार फिर मजबूत होती दिखाई दे रही है। रूस की 450 सदस्यीय स्टेट ड्यूमा (संसद) के चुनाव में पुतिन की पार्टी यूनाइटेड रशिया ने 355 सीटों पर जीत दर्ज की है। यह पार्टी के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा बताया जा रहा है। चुनावी नतीजों के बाद यूनाइटेड रशिया को संसद में संवैधानिक बहुमत से भी अधिक सीटें मिल गई हैं। संवैधानिक बदलावों के लिए जरूरी 301 सीटों के मुकाबले पार्टी के पास अब काफी ज्यादा संख्या बल है।
इससे पहले 2016 के चुनाव में यूनाइटेड रशिया ने 343 सीटें जीती थीं, जबकि 2021 में पार्टी को 324 सीटों पर सफलता मिली थी। इस बार सीटों की संख्या बढ़ने के साथ संसद में पार्टी का प्रभाव और मजबूत हुआ है। रूस की संसद में यूनाइटेड रशिया के अलावा कुछ अन्य दल भी मौजूद हैं, लेकिन चुनावी परिणामों के अनुसार कोई भी पार्टी सत्ता पक्ष के सामने बड़ी चुनौती के रूप में उभर नहीं पाई है। व्लादिमीर पुतिन पिछले दो दशकों से अधिक समय से रूस की राजनीति के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। उनके समर्थक उन्हें देश की स्थिरता और
अंतरराष्ट्रीय
प्रभाव बढ़ाने वाले नेता के रूप में देखते हैं, जबकि आलोचक रूस में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और विपक्ष की स्थिति को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।
रूस की राजनीति में विपक्षी नेताओं और समूहों को लेकर लंबे समय से बहस होती रही है। कई विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि राजनीतिक व्यवस्था में उनके लिए समान अवसर नहीं हैं। वहीं, रूसी सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है और चुनाव प्रक्रिया को वैध बताती है। यूनाइटेड रशिया की इस जीत के बाद संसद में सरकार के लिए नीतिगत फैसलों को आगे बढ़ाना आसान हो सकता है। पार्टी के पास कानून बनाने और राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत समर्थन मौजूद रहेगा।
रूस दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां राष्ट्रपति प्रणाली और संसद की भूमिका दोनों महत्वपूर्ण हैं। स्टेट ड्यूमा देश के कानून बनाने वाले प्रमुख संस्थानों में से एक है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रूस के चुनावों पर नजर रहती है। पश्चिमी देशों के कई पर्यवेक्षक रूस की राजनीतिक व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते रहे हैं, जबकि रूस इन आलोचनाओं को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताता है। फिलहाल चुनाव परिणामों के बाद पुतिन समर्थक पार्टी की स्थिति और मजबूत हुई है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई संसद में सरकार की नीतियों और विपक्ष की भूमिका किस दिशा में आगे बढ़ती है।
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